जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
जबलपुर | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन में संचालित कैलाश जी वाटर पार्क को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट सवाल किया है कि यह वाटर पार्क कोर एरिया में स्थित है या बफर जोन में? यदि यह बफर जोन में है, तो क्या इसके संचालन के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति ली गई है? मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को इन दो अहम बिंदुओं पर 9 फरवरी को जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
यह जनहित याचिका जबलपुर के सोशल एक्टिविस्ट अभिषेक पाठक द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कैलाश जी वाटर पार्क बिना वैधानिक अनुमति के संचालित हो रहा है। वाटर पार्क से निकलने वाला रसायनयुक्त दूषित पानी आसपास के वन क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है।
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इससे मिट्टी और भू-जल प्रदूषण हो रहा है
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प्राकृतिक वनस्पति को नुकसान पहुंच रहा है
वन्यजीवों पर खतरे का आरोप
याचिका में यह भी कहा गया है कि दूषित पानी के कारण हिरण, सांभर और बाघ जैसे वन्यजीवों के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।
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वन क्षेत्र में बड़े पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया है
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वन्यजीवों के प्राकृतिक मूवमेंट कॉरिडोर बाधित हो रहे हैं
शासकीय अधिवक्ता को निर्देश
सोमवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रभात यादव ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन को कहा कि—
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यह स्पष्ट किया जाए कि वाटर पार्क कोर एरिया या बफर जोन में है
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यदि बफर जोन में है, तो उसके लिए अनुमति और वैधानिक स्वीकृति का विवरण प्रस्तुत किया जाए
